आदमी की बुरी सोच भी लोहे के जंग की ही तरह है

लोहे को कोई नष्ट नहीं कर सकता बस उसका जंग ही उसे नष्ट करता है,

इसी तरह आदमी को भी कोई और नहीं बल्कि उसकी सोच ही नष्ट कर सकती है।

सोच अच्छी रखो, निश्चित अच्छा ही होगा ।

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