ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है

शाम सूरज को ढ़लना सिखाती है,
शमा परवाने को जलना सिखाती है,

गिरने वाले को होती तो है तकलीफ,
पर ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है…

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