Month: October 2017

जागो जीवन के अभिमानी, कन्हैया लाल सेठिया जी की कविता

जागो, जीवन के अभिमानी ! जागो, जीवन के अभिमानी ! लील रहा मधु-ऋतु को पतझर, मरण आ रहा आज चरण धर, कुचल रहा कलि-कुसुम, कर रहा अपनी ही मनमानी …

यह चीजे ईश्वर को बहुत पसंद है

प्रेम से भरी हुईं “आँखें” श्रद्धा से झुका हुआ “सर”, सहयोग करते हुऐ “हाथ”, सन्मार्ग पर चलते हुए “पाँव”, और सत्य से जुडी हुई “जीभ”, ईश्वर को बहुत पसंद …

इंतज़ार कर रहा हूँ की पूरी नदी बह जाएं तो फिर पार करूँ

एक फ़कीर नदी के किनारे बैठा था. किसी ने पूछा : ‘बाबा क्या कर रहे हो?’ फ़कीर ने कहा : ‘इंतज़ार कर रहा हूँ की पूरी नदी बह जाएं …