Category: Poems (कविता)

जागो जीवन के अभिमानी, कन्हैया लाल सेठिया जी की कविता

जागो, जीवन के अभिमानी ! जागो, जीवन के अभिमानी ! लील रहा मधु-ऋतु को पतझर, मरण आ रहा आज चरण धर, कुचल रहा कलि-कुसुम, कर रहा अपनी ही मनमानी …