तड़प : आंखें खोल देने वाली कहानी कहानी

 

Tadap Aankhein Khol Dene Wali Kahani

एक बार एक छोटा सा बच्चा अपने बेहद अमीर पिता की ऊँगली थामे नदी के किनारे सैर कर रहा था। नदी का पानी धीरे धीरे बह रहा था। बच्चे की नज़रें ढूंढ रही थीं नदी में रहने वाली मछलियों को, बच्चा कभी आगे जाता तो कभी पीछे आता। मछलियों से उसका सामना नहीं हो पता।

अचानक थोड़ी दूर चलकर उस बच्चे को नदी के किनारे एक मछली मिल ही गयी, मछली गलती से नदी के किनारे पे चली आयी थी और बुरी तरह से तड़फ रही थी। मछली की तड़फ बच्चे से देखी नही गयी वो फौरन अपने पापा से बोला- पापा मछली शायद भूखी होगी, चलो इसे फाइव स्टार होटल में खाना खिलाते हैं पापा मुस्कराये, बच्चा परेशान हो गया। वो बोला- पापा मछली को शायद नींद आ रही होगी, चलो इसे ले जाकर सोने के पलंग पर सुलाते हैं।

यह सुनकर पापा ने कहा नहीं बेटे मछली को सोना-चांदी, रुपया-पैसा खुश नही कर सकते, यह तो तभी खुश होगी जब इसे वापिस नदी में डाल देंगे और बच्चे ने उसे उठाकर नदी में डाल दिया, मछली झट से खुश होकर नदी में तैरने लगी।

ठीक इसी मछली की तरह हम और आप भी तड़फ रहे हैं इस भौतिक जगत में भगवान से दूर होकर रुपया-पैसा, धन-दौलत, बड़ी-बड़ी उपलब्धियां बड़े-बड़े सम्मान हमारी तड़फ, हमारे दुःखों को कम नहीं कर पाते, थोड़ी समय के लिए ख़ुशी जरूर मिलती है, इन्हें पाकर लेकिन फिर तड़फ और बेचैनी अपने कब्जे में ले लेती है हमें।

हम भी भगवान के अंश होकर भगवान से बहुत दूर हैं और बहुत बहुत तड़फ रहे हैं भगवान की कृपा से जब कोई दिव्य आत्मा आकर हमारा हाथ भगवान के हाथ में थमा देता है तब हमें हमारी बेचैनी से छुटकारा मिल सकता है वरना ये दुःख, तकलीफ हमेशा यूँ ही जारी रहेंगी।

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