व्यक्तित्व की भी अपनी वाणी होती है, जो…

“व्यक्तित्व” की भी
अपनी वाणी होती है,
जो “कलम”‘ या “जीभ”
के इस्तेमाल के बिना भी,
लोगों के “अंर्तमन” को छू जाती है..!!!

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